हर व्यक्ति को अपने शरीर में होने वाले तात्कालिक परिवर्तनों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए बल्कि किसी भी ऐसी स्थिति होने के शुरूआती लक्षणों के सामने आने डाक्टर से सलाह जरुर लेना चाहिए। यदि ऐसे शुरूआती लक्षणों में किसी को बुखार, कमजोरी, थकान, रक्तस्राव के लक्षण दिखे तो इसे बहुत ही प्राथमिकता देनी चाहिए। अगर ऐसा व्यक्ति बार-बार संक्रमण हो रहा है तो इसे नजर अंदाज न करें। यह लक्षण ब्लड कैंसर के हो सकते हैं। ऐसे लक्षण प्रतीत होने पर तुरंत हेमटोलॉजिस्ट या हेमटो-ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। जहाँ तक ब्लड कैंसर के प्रकार की बात है तो वह कई प्रकार के होते हैं। इनमें एक्यूट, क्रॉनिक ल्यूकीमिया, हॉजकिन और गैर-हॉजकिन के लिंफोमा या मल्टीपल मायलोमा के कैंसर शामिल हैं। सभी ब्लड कैंसर जीवन के लिए खतरा नहीं होते हैं। कुछ कैंसर की जल्द पहचान और उपचार से मरीजों को काफी हद तक राहत दी जा सकती है। शीघ्र निदान के लिए कैंसर के प्रति जागरूकता आवश्यक है।

इस कोरोना संक्रमण के समय कैंसर मरीज सतर्कता और सावधानी बरतते हैं तो उन्हें गंभीर समस्याओं से समय रहते निजात मिल सकती है। क्योंकि ऐसे लोगों की प्रतिरोधक क्षमता सामान्य लोगों के मुकाबले प्रतिरोधक क्षमता से काफी कमजोर होती है। इन्हें संक्रमण होने का खतरा कई गुना ज्यादा होता है। घर से बाहर जाने पर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। दूसरी तरफ बदलते समय में प्रदुषण की मार करोना की मारक क्षमता को बढ़ा देते हैं अतः प्रदूषण और धूम्रपान से फेफड़े का कैंसर होने की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। तंबाकू का सेवन किसी भी रूप में नुकसान दायक है। यहीं कारण है कि मौजूदा समय में मुंह, गला, खाने की नली, बच्चेदानी, फेफड़ा, आंत, पैंक्रियाज, लिवर और दिमाग के कैंसर के मामलों में इजाफा हो रहा है। ऐसी बीमारियों से बचाव के लिए धूम्रपान, तम्‍बाकु, सुपारी, पान, मसाला, गुटका, शराब के सेवन से बचें। जबकि विटामिन युक्‍त और रेशेदार हरी सब्‍जी, फल, अनाज, दालें खानपान में शामिल करें और कीटनाशक एवं खाद्य संरक्षण रसायणों से युक्‍त खानपान की चीजें धुलकर खायें।

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