पाकिस्तान में उथल- पुथल जारी है। कल एक होटल को ही तथाकथित आतंकवादियों ने उड़ा दिया जबकि उसी होटल में चीनी राजदूत ठहरे हुए थे। इस विस्फोट में छः से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। इस संदर्भ में चीन को भारी सदमा पहुंचा है। यह सभी जानते हैं कि चीन की महत्वकांक्षी योजना “बीआरआई” अधर में लटक गई है। इस तरह चीन को बुधवार (21 अप्रैल 2021) को दो बड़े झटके लगे। एक पाकिस्तान में जहाँ वह लगातार दखल बढ़ा रहा है वहां स्थानीय लोगों का गुस्सा चरम पर है। दूसरा झटका वैश्विक प्रभाव बढ़ाने के उसके मॅंसूबों को ऑस्ट्रेलिया ने दिया है।


पाकिस्तान के क्वेटा में कार बम विस्फोट में पाकिस्तानी तालिबान ने उस होटल को उड़ा दिया, जिसमें चीन के राजदूत ठहरे थे। हमले में 6 लोगों की मौत हो गई जबकि 12 अन्य जख्मी हो गए। वहीं, ऑस्ट्रेलिया की स्कॉट मॉरिसन सरकार ने चीन के साथ हुए ‘बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई)’ से संबंधित समझौतों को रद्द कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। ये समझौते ऑस्ट्रेलिया की प्रांतीय विक्टोरिया सरकार और चीन के नेशनल डेवलपमेंट एण्ड रिफॉर्म कमीशन के मध्य अक्टूबर 2018 और अक्टूबर 2019 में हुए थे। चीन ने ऑस्ट्रेलिया के इस कदम को दुर्भावनापूर्ण और अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बताया है। बुधवार (21 अप्रैल 2021) को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेराइस पेन ने चीन के साथ हुए चार समझौतों को रद्द करने की घोषणा की। इन चार समझौतों में से दो समझौते ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरिया प्रांत की सरकार ने किए थे, जो चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बीआरआई से जुड़े थे। 
बीआरआई के तहत समझौतों को रद्द करने के ऑस्ट्रेलिया के निर्णय के बाद चीन नाराज हो गया है। ग्लोबल टाइम्स के हवाले से चीनी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया का यह निर्णय चीन और ऑस्ट्रेलिया के मध्य संभावित ट्रेड वॉर का कारण बन सकता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि का यह निर्णय बताता है कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार चीन के साथ संबंधों को सुधारने के प्रति बिल्कुल भी ईमानदार नहीं है। पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया ने चीन को लेकर अपना रवैया अधिक स्पष्ट किया है। फिर चाहे वह चाइनीज कंपनी हुआवे को बैन करने की बात हो या फिर शिनजियांग और हॉन्गकॉन्ग में मानवाधिकारों पर आवाज उठाने की। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने ताइवान समेत चीन के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा करने की माँग भी की थी। हालाँकि चीन से ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते तब से ही खराब हैं जब ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस महामारी के विषय में चीन की स्वतंत्र रूप से जाँच की माँग की थी।


जिस प्रकार से ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेराइस पेन ने चीन के बीआरआई से जुड़े समझौतों को रद्द करने के लिए अपने विदेशी संबंधों की स्थिरता की दुहाई दी, उसे भारत के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। भारत ने शुरू से ही चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से अपनी दूरी बनाकर रखी। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत ही एकमात्र ऐसा बड़ा देश रहा है जिसने मुखरता से चीन की विस्तारवादी नीतियों की आलोचना की और इसके लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए।
भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का ‘क्वाड’ समूह हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों का सबसे बड़ा अवरोध बन सकता है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया द्वारा चीन के साथ समझौतों को रद्द किया जाना हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में नए सामरिक समीकरणों का निर्माण करेगा, जिसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।

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