तंरिक रिपोर्ट के अनुसार चीन की हरेक रणनीति भारत के सन्दर्भ में ही रची जा रही है। चीन यह पूरी तरह जानता है कि आने वाले समय में अगर कोई उसका मजबूत प्रतिद्वंदी हो सकता है, या है, वह भारत ही है। भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनितिक मजबूती व इक्षाशक्ति वह ताकत है जिससे चीन भय खाता है। यही कारण है कि समय-समय पर वह भारत को घेरने के लिए पड़ोसियों के साथ अपने संबंधों को किसी भी कीमत पर बढ़ाना चाहता है। अभी हालिया भारत के साथ कई मुद्दों व सरहदों पर मुंह की खाया चीन भारी तनाव के बीच अरुणाचल प्रदेश से सटे अपने इलाके में रेल लाइन बिछाने की पूरी तैयारी कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणनीतिक रूप से अहम यह ट्रैक दक्षिण पश्चिम सिचुआन प्रांत और तिब्बत के लिनझी के बीच बिछाया जाएगा।

चाइना रेलवे ने शनिवार (३१/११/२०२०) को रेल लाइन से जुड़ी दो टनल और एक पुल के निर्माण के लिए लगाई गई बोली के नतीजों की घोषणा की। इसके साथ ही पावर सप्लाई प्रोजेक्ट भी तैयार किया जाएगा। किंघई-तिब्बत रेलवे के बाद तिब्बत में इस तरह का यह दूसरा प्रोजेक्ट है। यह रेल लाइन किंघई-तिब्बत पठार के दक्षिण-पूर्व से गुजरेगी। यह जियोलॉजिकली दुनिया का सबसे ज्यादा एक्टिव एरिया है। यह जानकारी सरकार की ओर से संचालित चाइना न्यूज ने दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिचुआन-तिब्बत रेलवे लाइन सिचुआन प्रांत की राजधानी चेंगदू से शुरू होकर येयान होते हुए कामाडो से तिब्बत में प्रवेश करेगी। इस लाइन के बिछने से चेंगदू से ल्हासा तक की यात्रा में 48 के बजाय महज 13 घंटे लगेंगे।

तिब्बत का लिनझी, जिसे निंगची के नाम से भी जाना जाता है, अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानता है। भारत इसका विरोध करता रहा है। लिनझी में बना एयरपोर्ट चीन की ओर से हिमालयी क्षेत्र में बनाए गए 5 हवाई अड्डों में से एक है। प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि यह रेल परियोजना 1011 किलोमीटर लंबी होगी। इस ट्रैक पर 26 स्टेशन होंगे। इस पर चलने वाली ट्रेनों की रफ्तार 120 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट पर कुल 320 बिलियन युआन (करीब 4700 करोड़ रुपये) की लागत आएगी।

चीन का यह प्रयास भारत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।  

चीन के अनुसार राष्ट्रीय एकता की रक्षा और सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए सिचुआन-तिब्बत रेलवे का बहुत महत्व है। इस लाइन के शुरू होने के बाद तिब्बत चीन के कई दूसरे मुख्य हिस्सों के साथ जुड़ जाएगा। रणनीतिक रूप से चीन के तिब्बती क्षेत्र में सामान की आवाजाही और रसद आपूर्ति की क्षमता बढ़ जाएगी। वही यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर भारत की सीमा पर हालात बिगड़ते हैं तो रेल लाइन के जरिए युद्ध से जुड़ा सामान पहुंचाने में चीन को बड़ी सहूलियत होगी। जबकि सिचुआन और तिब्बत दोनों प्राकृतिक रूप से काफी सुंदर हैं। दोनों जगह विशाल खनिज भंडार और औषधीय जड़ी-बूटियों की उपलब्धता है। सिचुआन-तिब्बत रेलवे परियोजना के पूरा होने के बाद स्थानीय पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जबकि यह परियोजना मूलतः भारत को ध्यान में रखकर ही बनाई जा रही है। अतः सरकार को इस पर नजर रखने की जरुरत है।

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