1985 बैच के महाराष्ट्र कैडर IPS सुबोध कुमार जायसवाल को CBI का नया डायरेक्टर बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हाई लेवल कमिटी की मीटिंग में इसका फैसला लिया गया। इस कमिटी में भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल थे।


मंगलवार को पर्सनल मिनिस्ट्री ने उनकी नियुक्ति का ऑर्डर जारी किया। CBI डायरेक्टर का पद फरवरी से खाली है। अभी अतिरिक्त निदेशक प्रवीण सिन्हा इसके अंतरिम प्रमुख हैं।
CBI चीफ की दौड़ में उत्तर प्रदेश के DGP एचसी अवस्थी, SSB के DG कुमार राजेश चंद्रा और गृह मंत्रालय के विशेष सचिव वीएसके कौमुदी आगे चल रहे थे, लेकिन आखिर में सुबोध कुमार जायसवाल का नाम फाइनल किया गया। वे दो साल तक इस पद पर रहेंगे। सुबोध कुमार जायसवाल महाराष्ट्र के DGP और ATS चीफ रह चुके हैं। अभी वह CISF के डायरेक्टर जनरल हैं। 58 साल के जायसवाल 2022 में रिटायर होंगे।


सीनियर IPS ऑफिसर सुबोध जायसवाल बेदाग छवि के अफसर माने जाते हैं। पुलिस सेवा में बेहतरीन काम के लिए उन्हें 2009 में प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से भी नवाजा जा चुका है। जायसवाल को जासूसों का मास्टर भी कहा जाता है। उन्होंने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) में भी अपनी सेवाएं दी हैं। वह कैबिनेट सचिवालय में अतिरिक्त सचिव भी रह चुके हैं। जायसवाल ने कई बड़े मामलों की जांच लीड की है।


मुंबई पुलिस में रहते हुए वह करोड़ों रुपए के जाली स्टंप पेपर घोटाले की जांच करने वाली स्पेशल टीम के चीफ थे। साल 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट की जांच भी सुबोध कुमार जायसवाल ने ही की थी। वह प्रधानमंत्री, पूर्व PM और उनके परिवारों की सुरक्षा करने वाले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के इंटेलिजेंस ब्यूरो में भी काम कर चुके हैं।36 साल के कैरियर में चार प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके सुबोध कुमार ने एक कार्यक्रम में बताया था कि वे झारखंड के छोटे से गांव से हैं। ग्रेजुएशन और MBA करते हुए उन्होंने तीन बार नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) का एग्जाम दिया, लेकिन तीनों बार नाकामयाब रहे। उन्होंने तब बताया था कि UPSC का एग्जाम क्लियर करने के बाद उन्हें पता नहीं था कि इसके बाद नौकरी कौन सी मिलनी है।

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