अर्णव गोस्वामी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके साथ कुछ भी हो सकता है, एनकाउंटर पुलिसकर्मियों की टीम ने उन्हें घर से उठा लिया। यह उसी दिन तय हो गया था जिस दिन इन्होंने पालघर में साधुओं की हत्या को लेकर एंटोनियो माइनो की भावना पर प्रहार किया था! आज अभिव्यक्ति की आजादी के ठेकेदार कहीं नहीं दिखेंगे? किधर है सब? दोस्तों असहिष्णुता गैंग किधर है? देश के प्रधानमंत्री को दिन रात गाली देने वाले किधर ग‌ए? आज लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर यह राजनीतिक आक्रमण है, चुप रहने का अर्थ यह कतई नहीं है कि आप की बारी नहीं आएगी! पर अफ़सोस इस बात का है कि तमाम दुसरे मिडिया हाउस चुप हैं, ख़ामोश हैँ, अपनी विचारधारा की जीत में गुदगुदा रहे हैं, घोर आश्चर्य! दूसरे अर्थ में ये अघोषित आपातकाल नही तो क्या है? ये लोकतंत्र की हत्या नहीं है तो क्या है?  जिन्हें लोक कल्याण के लिए चुना गया है वहीं लोकतंत्र को रौंदते नजर आ रहे है। कहाँ गये वो लोकतंत्र का रोना रोने वाले नेतागण और मीडिया समूह? मुंबई पुलिस की खुलेआम गुंडागर्दी, अर्णब गोस्वामी और उनके परिवार के साथ घर मे घुसकर पुलिसवाले गुंडो ने मारपीट की और अर्णब को घसीटकर ले गए!

दूसरी तरफ, अर्णव गोस्वामी की गिरफ्तारी जैसे मामले में संविधान राष्ट्रपति और केंद्र सरकार को हस्तक्षेप की पूरी इजाजत देता है। कुछ लोग अभी भी भाजपा कार्यकर्ता की अपनी सोच से बाहर नहीं निकल पाए हैं। ऐसे लोगों में न लोकतंत्र की समझ है, न संविधान की। एक समय टाइम्स ऑफ इंडिया के मालिक विनीत जैन के पिता अशोक जैन को जब  ईडी ने 1998 में गिरफ्तार किया था तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने हस्तक्षेप किया था। आज उचित कारण है कि इस विषय में माननीय प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए। जब अर्णब गोस्वामी ने पुलिस वैन से कहा, “इन्होंने मुझे मारा है। मेरे साथ शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार किया है।” बता दें कि महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने आपराधिक मामला दायर किया था। इस ‘रिट पेटिशन’ पर सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे की सरकार की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने बतौर अधिवक्ता हिस्सा लिया। महाराष्ट्र की उद्धव सरकार का कोर्ट में प्रतिनिधित्व करने के लिए कपिल सिब्बल को 10 लाख रुपए और वकील राहुल चिंटिस को 1.5 लाख रुपए प्रति सुनवाई दिए जाने का निर्णय लिया गया था।

One thought on “अभिव्यक्ति की आज़ादी का चीर-हरण, केंद्र की ख़ामोशी ठीक नहीं!”
  1. ये सही नही हुआ।
    आज जो अर्नब गोस्वामी के साथ हुआ वो कल आप के साथ भी हो सकता है ..यदि आप असत्य के ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाते!!

    “समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध
    जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध”
    #IndiaStandaWithArnab

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