आज एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना महामारी की मार से त्राहीमाम कर रही है वहीं अपने देश का केंद्रीय नेतृत्व अपनी क्षमता और कुशल प्रबंधन से देशवासियों को बहुत हद तक सुरक्षित रखने में सक्षम रहा है। यह अलग प्रश्न है कि कोरोना की इस दूसरी लहर व व्यापकता की भयावहता ने लोगों को बेचैन कर दिया है। सारी व्यवस्थाएं चरमरा गई है, गरीब-मजदूर-प्रवासी लोगों का विस्थापन चरम पर है, जबकि सरकारे अपना प्रयास कर रही है। दूसरी तरफ, इस महामारी में भी विपक्षी दलों की घटिया राजनीति जारी है, उनके लिए यह मौका बन गया है ताकि केंद्र की मोदी सरकार को घेरा जा सके।

इस विषय पर अरवल जिला निवासी व बिहार भाजपा के युवा नेता तथा सफल समाजसेवी सत्येंद्र कुमार कहते हैं, “विपक्ष अपना आपा खो चुका है, घटियापे की हद तक गिर चुका है। यह नरेंद्र मोदी की सरकार ही हैं जिसने सबकुछ संभाल लिया है वरना करोड़ों की संख्या का नुकसान हो चुका होता!” वे आगे कहते हैं,- पिछले 50 सालों के कांग्रेस राज में सिर्फ दो AIIMS बन सके थे जबकि अटल बिहारी वाजपेयी जी के समय भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर,  पटना, रायपुर और ऋषिकेश में 6 नये एम्स स्थापित करने का निर्णय हुआ। ये सभी 6 एम्स आज कार्यरत हैं। इसके बाद मनमोहन सिंह सरकार ने 2013 में एक नये एम्स की घोषणा की जो रायबरेली में लगभग बनकर तैयार है। इस साल से यहां भी रोगियों की भर्ती शुरु हो जाएगी। इन 8 एम्स के अतिरिक्त नरेन्द्र मोदी सरकार ने जिन 14 एम्स को मंजूरी दिया है उसमें तीन को छोड़कर बाकी सब कार्यरत हो चुके हैं। कुछ में सिर्फ ओपीडी संचालित हो रही है। कुछ पूरी तरह से ऑपरेशनल हैं। कुछ का निर्माण शुरु होना बाकी है। अगले तीन चार सालों में ये सभी 22 एम्स अपनी सेवाएं देने लगेंगे।

आप सहज अनुमान लगा सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कितना काम हुआ है। जबकि देश के तमाम तथाकथित बुद्धिजीवी यह कहते पाए जा रहे हैं कि मोदी ने छः साल में क्या किया है? अरे मूर्खों आंखें तो खोलों, सबकुछ दीख जाएगा। हां, विपक्ष है तो राजनीति होगी ही लेकिन यह राजनीति उनलोगों को शोभा नहीं देती है जिनके बाप-दादों ने देश को कई प्रकार के जख्म दिए हों! सत्येंद्र एक तरह से विपक्ष को खुला चैलेंज दे रहे हैं कि यदि आपने या आपकी पार्टी की सरकार ने वाकई देश को एक मुकाम दिया है तो सामने आइये, बात कीजिये, पानी की तरह सफेद और नंगा कर दूंगा। लेकिन ईश्वर के लिए इन गरीब भाइयों-बहनों की लाश पर गिद्ध दृष्टि मत डालिये, इन्हें आज मदद की जरूरत है, मदद नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं है लेकिन कम से कम सरकार का साथ तो दीजिये। यही सभी का कर्तव्य है, आप भी अपने धर्म का पालन करिये, नहीं तो ईश्वर माँफ नहीं करेगा। वहीं, जनता तो माफ़ करेगी ही नहीं।

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