इस देश के गृहमंत्री, रक्षामंत्री, वित्तमंत्री समेत सरकार का हर मंत्री कह रहा है कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हो रही है। जबकि, यह भी सच है कि इन सभी मंत्रियों समेत पूरी केन्द्र सरकार कुछ संवैधानिक मर्यादाओं में बंधी हुई है। यहीं कारण है कि ये सभी मंत्री मुम्बई जाकर या दिल्ली में भी धरने पर नहीं बैठ सकते हैं क्योंकि प्रोटोकाल ऐसा करने की इजाजत नहीं देता है। लेकिन दूसरी तरफ, महाराष्ट्र का पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में नेता विपक्ष देवेन्द्र फड़नवीस कहां गायब है? गजब संयोग देखिये कि देवेन्द्र फड़नवीस कोविड पॉजिटिव घोषित होकर क्वारेंटाईन हुए और अरनब गोस्वामी तथा उसके रिपब्लिक चैनल पर कहर बरसने लगा! लेकिन भाजपा के शेष 104 विधायक भी क्या कोविड आइसोलेशन में हैं? उन्हें विरोध के लिए निर्देशित करने से किसने रोका? वैसे भी महाराष्ट्र में ये नाटक पिछले डेढ़ दो महीने से चल रहा है। 7 अक्टूबर को फ़र्जी टीआरपी  केस के साथ ये खेल खुलकर खेला जाने लगा था। महाराष्ट्र में खुलेआम लोकतंत्र की निर्मम हत्या कर रही सरकार का प्रचंड विरोध करने से उसे कौन रोक रहा है?

फ़ोटो: साभार PTI

महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या के तथाकथित विरोध में महाराष्ट्र के 105 भाजपा विधायकों में से केवल एक विधायक धरने पर बैठा और 40-50 मिनट बाद उसे भी पुलिस ने हिरासत में लेकर धरने से हटा दिया। शेष विधायक क्या कर रहे हैं? सरकार के साथ सांठगांठ कर के किए जाने वाले ऐसे विरोध प्रदर्शनों के सच को पिछले 25 वर्षों के दौरान खूब देख चुका हूं। जबकि संजय राउत द्वारा महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस से होटल में हुई मुलाक़ात क्या कुछ कहती है, या ऐसा कहा गया कि वह एक पत्रकार का पूर्व मुख्यमंत्री का साक्षात्कार के लिए मुलाक़ात थी! आज इन विषयों पर देश की जनता सफाई चाहती है। जबकि देश के गृहमंत्री, रक्षामंत्री, वित्तमंत्री समेत सरकार का हर मंत्री कह रहा है कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हो रही है, ऐसी स्थिति में अपने सभी विधायकों के साथ महाराष्ट्र की सरकार उसके मुख्यमंत्री के विरोध में प्रदर्शन करने, धरने पर बैठने से महाराष्ट्र भाजपा को कौन रोक रहा है? पार्टी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व की मंशा के विरुद्ध आचरण की ताकत देवेन्द्र फड़नवीस को कौन दे रहा है? उसके वो आका कौन हैं जिनकी दी गयी ताकत के बल पर देवेन्द्र फड़नवीस खुद को स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी और पूर्व प्रधानमंत्री स्व चन्द्रशेखर जी से भी बड़ा नेता मान और समझ रहा है।

मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं इसे भी समझिए। दक्षिण भारत में सक्रिय ईसाई मिशनरी के खिलाफ़ कांची पीठ के शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती ने जब शंखनाद किया था तब उनके खिलाफ भी बिल्कुल इसी तरह की कार्रवाई की गयी थी। लेकिन उस समय उस कार्रवाई के विरुद्ध इस देश के दो सर्वकालिक महान नेता पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी और पूर्व प्रधानमंत्री स्व चन्द्रशेखर जी दिल्ली में धरने पर बैठ गए थे। ध्यान रहे कि पालघर में पुलिस के घेरे में, पुलिस संरक्षण में, पुलिस की आंखों के सामने जो दो हिन्दू साधू मौत के घाट उतार दिए गए थे. वो दोनों साधू पालघर के पूरे इलाके में सक्रिय ईसाई मिशनरी द्वारा कराए जा रहे धर्म परिवर्तन के खिलाफ़ पूरी शक्ति से लड़ रहे थे। अरनब गोस्वामी उन साधुओं की हत्या के खिलाफ़ लगातार अभियान चला रहा है। इन आकाओं ने सर्वकालिक महान नेता “यूपी” वाले हिन्दी भाषी पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी का भी कभी सम्मान नहीं किया था, उन्हें कभी महत्व नहीं दिया था, बल्कि उनकी नाक में दम करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी थी। सच तो यह है कि इन आकाओं को एक दमदार गुजराती प्रधानमंत्री भी रास नहीं आ रहा है, बिल्कुल नहीं सुहा रहा है। लेकिन इस प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) का कद इतना बड़ा हो चुका है कि उससे सीधा टकराव बहुत महंगा पड़ेगा। इसलिए इनदिनों जो कुछ महाराष्ट्र में हो रहा है, वो प्रधानमंत्री की नाक में दम करने के लिए ही हो रहा है।

राजनीति की थोड़ी बहुत समझ रखने वाला व्यक्ति यह समझ सकता है कि ममता बनर्जी सरीखी लगभग तीन चौथाई प्रचंड बहुमत वाली मुख्यमंत्री अगर मनमानी करती है तो बात गले के नीचे उतरती है। लेकिन तीन टांग की कुर्सी पर बैठे किसी नौसिखिया मुख्यमंत्री में इतनी राजनीतिक सूझबूझ इतना राजनीतिक दमखम नहीं होता कि वो देश के संविधान और कानून को ताक पर रखकर मनमानी पर उतारू हो जाए। ऐसा तब ही होता है जब वो आश्वस्त होता है कि केन्द्र उसके खिलाफ कुछ भी नहीं कर पाएगा। इन आकाओं के उन कारनामों, उनके घातक दबाव की कहानी को तथ्यों के साथ खुलकर लिखूंगा तो आप लोग चौंक जाएंगे। लगता है वो कहानी लिखने का समय बहुत निकट आता जा रहा है। फ़िलहाल इतना जानिये कि देश के दो सर्वकालिक महान नेता पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी और पूर्व प्रधानमंत्री स्व चन्द्रशेखर जी शंकराचार्य जी की गिरफ्तारी के विरोध में जब दिल्ली में धरने पर बैठे थे वैसा आज कोई नेता नहीं दिख रहा है जो अर्नव की गिरफ्तारी के खिलाफ ऐसा साहसिक कदम दिखा सके। साभार

साभार: एस सी मिश्र

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